पाठ्यपुस्तक प्रश्न और उत्तर (पृष्ठ 148)
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1. चित्र में क्या दिखाई दे रहा है?
चित्र में एक बालक घुटनों के बल बैठकर हाथ में कुछ कागज़ (पत्र) लिए हुए उसे पढ़ रहा है। उसके पास ज़मीन पर एक बस्ता (थैला) रखा हुआ है।
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2. बालक क्या कर रहा होगा?
बालक अपने बस्ते में से निकाले हुए पत्र या कागज़ को ध्यानपूर्वक पढ़ रहा होगा।
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3. हमारे जीवन में पत्रों का क्या महत्व है?
पत्र हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं। पत्र अपनी भावनाएँ, विचार और सूचनाएँ दूसरों तक पहुँचाने का एक प्रभावी साधन हैं। इसके माध्यम से हम दूर बैठे अपने प्रियजनों से अपने मन की बात कह सकते हैं।
अर्थग्राह्यता-प्रतिक्रिया (पृष्ठ 151)
(अ) प्रश्नों के उत्तर सोचकर दीजिए।
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1. पुराने समय में पत्र कैसे भेजे जाते थे?
पुराने समय में पत्र कबूतरों के गले में बाँधकर, घोड़ों पर सवार हरकारों (संदेशवाहकों) द्वारा, पैदल संदेशवाहकों द्वारा तथा बाद में रेल और बस डाक सेवा के माध्यम से भेजे जाते थे।
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2. विविध उत्सवों व शुभसंदर्भों पर शुभकामनाएँ कैसे दी जाती हैं?
विविध उत्सवों व शुभसंदर्भों पर शुभकामनाएँ बधाई कार्ड (ग्रीटिंग कार्ड्स), पत्र भेजकर, टेलीफोन, मोबाइल संदेशों (एस.एम.एस.), ईमेल तथा सोशल मीडिया के माध्यम से दी जाती हैं।
(आ) गद्यांश पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से पहचानकर लिखिए।
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1. लेखक के पिताजी कौन-सी पुस्तक लाये?
Answer: B. श्रवण की पितृभक्ति
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2. लेखक ने कौन-सा नाटक देखा?
Answer: C. सत्य हरिश्चंद्र
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3. अगर आपके माता-पिता को मदद चाहिए, तो आपको क्या करना चाहिए?
Answer: B. उनकी मदद करना
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4. हरिश्चंद्र की तरह जीवन में हमें क्या करना चाहिए?
Answer: B. सच का पालन करना
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5. इस गद्यांश से क्या शिक्षा मिलती है?
Answer: B. माता-पिता की सेवा करना और सत्य बोलना
अभिव्यक्ति-सृजनात्मकता (पृष्ठ 152)
(अ) नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
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1. पत्रों की हमारे जीवन में क्या भूमिका होती है?
पत्र हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके माध्यम से हम अपने विचारों, भावनाओं, सुख-दुख और सूचनाओं को दूर-दूर तक अपने संबंधियों व मित्रों तक पहुँचा सकते हैं। पत्र आपसी संबंधों को मज़बूत बनाते हैं और ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में भी सुरक्षित रहते हैं।
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2. अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हमें क्या करना चाहिए?
अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हमें अपने अंदर असीम उत्साह और दृढ़ संकल्प पैदा करना चाहिए। हमें अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए बिना डरे और बिना किसी गलत मार्ग को अपनाए पूरी ईमानदारी व बहादुरी के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
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3. "मैं और तुम बहुत भाग्यशाली हैं।" नेहरू जी ने ऐसा क्यों कहा होगा?
नेहरू जी ने ऐसा इसलिए कहा होगा क्योंकि उनके सामने देश की स्वतंत्रता के लिए एक महान आंदोलन चल रहा था। वे दोनों केवल दर्शक नहीं थे, बल्कि प्रत्यक्ष रूप से उस ऐतिहासिक स्वतंत्रता आंदोलन में भाग ले रहे थे और देश के नवनिर्माण में अपना योगदान दे रहे थे।
(आ) पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
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'बेटी के नाम पत्र' पाठ पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा नैनी जेल से अपनी पुत्री इंदिरा को लिखा गया एक प्रेरणादायक पत्र है। नेहरू जी बताते हैं कि जन्मदिन पर उपहार तो बहुत मिलते हैं, लेकिन जेल में बैठे वे अपनी शुभकामनाएँ ही भेज सकते हैं। वे कहते हैं कि साधारण लोग अपनी रोज़मर्रा की चिंताओं में फँसे रहते हैं, पर जब कोई महान उद्देश्य सामने आता है, तो साधारण लोग भी वीर बन जाते हैं। महात्मा गांधी के नेतृत्व में देश में स्वतंत्रता का महान आंदोलन चल रहा है। नेहरू जी इंदिरा को सलाह देते हैं कि जीवन में ऐसा कोई काम न करो जिसे दूसरों से छिपाना पड़े। हमेशा बहादुर बनो ताकि किसी से डरना न पड़े और न ही लज्जित होना पड़े। वे देश की सेवा के लिए एक बहादुर सिपाही बनने की शुभकामना देते हैं।
(इ) बहादुरी से संबंधित कोई छोटी सी कहानी लिखिए।
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एक बार की बात है, ग्यारह वर्षीय बहादुर बालक बाबुगुड़ी तेरह वर्ष की आयु से पहले ही राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार प्राप्त कर चुका था। एक दिन उसने देखा कि एक चोर घर में घुस आया है और उसकी माँ पर हमला करने की कोशिश कर रहा है। अपनी जान की परवाह न करते हुए बालक ने तुरंत साहस दिखाया और चोर को पीछे से पकड़ लिया। उसकी इस असाधारण बहादुरी और सूझबूझ के कारण चोर पुलिस के हत्थे चढ़ गया और उसकी माँ की जान बच गई। उसकी इस बहादुरी की चारों तरफ सराहना हुई।
(ई) देश की रक्षा में तत्पर बहादुर सिपाहियों के योगदान के बारे में लिखिए।
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देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात बहादुर सिपाही कड़कड़ाती ठंड, भारी बर्फबारी, मरुस्थल की चिलचिलाती धूप और उफनती नदियों की परवाह किए बिना चौबीस घंटे देश की रक्षा में मुस्तैद रहते हैं। वे अपने घर-परिवार को छोड़कर सरहद पर डटे रहते हैं ताकि देश का हर नागरिक सुरक्षित रह सके। देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए वे हँसते-हँसते अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटते। उनका यह त्याग और समर्पण हमारे लिए प्रेरणास्त्रोत है।
भाषा की बात (पृष्ठ 152)
(अ) नीचे दिये गए एकवचन और बहुवचन के रूप समझिए।
| एकवचन | बहुवचन | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| उपहार | उपहार | पुस्तक | पुस्तके |
| राजा | राजा | समिति | समितियाँ |
| कवि | कवि (कविजन) | शुभकामना | शुभकामनाएँ |
| पक्षी | पक्षी (पक्षीवृंद) | कहानी | कहानियाँ |
| गुरु | गुरु (गुरुजन) | ऋतु | ऋतुएँ |
| लड़का | लड़के | बहू | बहुएँ |
(आ) रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित शब्दों से कीजिए।
- 1. नानी ने अपनी नवासी को 'जीती रहो बेटी' कहकर आशीर्वाद दिया।
- 2. आपको जन्मदिन की शुभकामनाएँ हैं।
- 3. खेल में आपकी जीत हुई इसके लिए आपको बधाई हो।
- 4. रुकावट के लिए खेद है।
परियोजना कार्य
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बाल अधिकार के बारे में जानकारी प्राप्त करके एक सूची बनाइए।
प्रमुख बाल अधिकारों की सूची:
1. जीने का अधिकार (जन्म का अधिकार, स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाएँ)
2. शिक्षा का अधिकार (निशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा)
3. संरक्षण का अधिकार (बाल श्रम, बाल विवाह, हिंसा और शोषण से सुरक्षा)
4. विकास का अधिकार (खेल-कूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और मानसिक विकास के अवसर)
5. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार (अपनी बात खुलकर कहने और सुनने का अधिकार)
सम्मक्का-सारक्का जातरा (पृष्ठ 154)
प्रश्न और उत्तर
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1. आंध्र प्रदेश सरकार ने सम्मक्का-सारक्का जातरा को किस तरह गौरवान्वित किया?
आंध्र प्रदेश राज्य सरकार ने इस ऐतिहासिक और जनजातीय जातरा के महत्व को देखते हुए वर्ष 1996 में इसे 'राज्य त्यौहार' के रूप में घोषित कर गौरवान्वित किया।
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2. इस जातरा को तेलंगाणा राज्य का कुंभमेला क्यों कहा जाता है?
इस जातरा के दौरान देवी की प्रतिष्ठापना और दर्शन के समय देश-विदेश से करोड़ों की संख्या में भक्तजन उमड़ पड़ते हैं। यहाँ जुटने वाली अपार भीड़ किसी कुंभ मेले से कम नहीं होती, इसीलिए इस जातरा को तेलंगाणा राज्य का 'कुंभमेला' कहा जाता है।
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3. सम्मक्का-सारक्का के जीवन से क्या संदेश मिलता है?
सम्मक्का-सारक्का के जीवन से हमें देश, संस्कृति, न्याय और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए वीरतापूर्वक संघर्ष करने तथा समाज के प्रति अपने आपको पूर्ण रूप से समर्पित कर देने की प्रेरणा मिलती है।
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